ban6.jpg

साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं अन्य पाठ्य सहगामी क्रियाएं

छात्र / छात्राओ की मानसिक एवं भावनात्मक प्रतिभा की परख के लिए महाविद्यालय में समय समय पर विवाद, निबंध, कथा-प्रतियोगिताओं, गोष्ठियों, नाटक तथा जय्नित्यों का आयोजन डॉ० श्रीमती विजय लक्ष्मी तिवारी एवं डॉ० अजिता भट्टाचार्या के निर्देशन में किया जाता है | 'महाविद्यालय महोत्सव' प्रतिवर्ष एक सप्ताह के लिए मनाया जाता हैं | जिसमें छात्र छात्राओ द्वारा खेलकूद, छात्राओं द्वारा मेला, विभिन्न साहित्यिक गोष्ठियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम, कवि सम्मेलन एवं पारितोषिक वितरण का आयोजन किया जाता है | यु०जी०सी० द्वारा रेमेडियल कोचिंग / कोर्स चलाने की अनुमति दी गई हैं जिसमें अनुसूचित जाती / जन - जाती के छात्रों के लिया विशेष रूप से अध्ययन की व्यवस्था है |

महाविद्यालय महोत्सवों में अनेक महान विभूतियों ने उपस्थित होकर छात्रों का उत्साहवर्धन किया है | इनमें प्रमुख रूप से शामिल है - पूर्व प्रमुख सचिव - महामहिम राज्यपाल श्री राय सिंह आई०ए०एस०, प्रो० बी० एन० अस्थाना पूर्व कुलपति, प्रो० एस० एस० कटियार कुलपति छत्रपति शाहूजी महाराज वि०वि० कानपुर, प्रो० ओ़म प्रकाश कुलपति रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय बरेली, प्रो० के० बी० पाण्डेय पूर्व अध्यक्ष लोक सेवा आयोग उ०प्र०, श्री गिरीश वर्मा पूर्व निबंधक उच्च न्यायालय इलाहाबाद, श्री श्याम सुन्दर शर्मा पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री उ०प्र० सरकार, श्री हिमांशु कुमार आई०ए०एस० उपा० इ०वि०प्रा०, डॉ० मियांजान निदेशक उच्च शिक्षा, डॉ० अजब सिंह यादव अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उ०प्र०, श्री शिवशंकर सिंह आई०ए०एस० पूर्व निदेशक उच्च शिक्षा आदि |

महाविद्यालय महोत्सव समारोह :-

'परिवार' लो़क जीवन की प्रारम्भिक संस्था है, जिसके विकास का सबसे शक्तिशाली आधार है - सदाचार | नारी सदाचार की आदि शक्ति रही है | अतः बालिकाओं की मनोभूमि को निरंतर विकसित करते हुए उनकी जिज्ञासा को सदा जीवन्त एवं स्तरीय रखना हमारा गुरूतर दायित्व है | रोजगार के साथ साथ सांस्कृतिक आधार भी विशेषकर नारी शिक्षा के लिए जरूरी है | समाज की सुव्यवस्था, संबंधो की दृढ़ता, परिष्कृत विचार, संस्कारों का परिमार्जन, आत्मशक्ति की ज्योतिमर्यता, राष्ट्रीय चरित्र की प्रतिष्ठा एवं समर्पण का तादाम्य जैसे गुण लोक जीवन में नारी को जीवन्त बना देते है |

राष्ट्र के विकास के लिए निरक्षरता के विरूद्व सबको युद्धरत होना है | असंतुलन को समाप्त करना है | जन- जीवन को सुखी बनाना, आस्थाओं के प्रति रुचि उत्पन्न करना तथा सत्यनिष्ठा और श्रम की प्रतिष्ठा उच्च शिक्षा के आदर्श है - इस संदर्भ में संस्था के संस्थापक प्रबंधक माननीय बाबू ओंकारनाथ अग्रवाल के कथन "बालक को शिक्षित करना सिर्फ एक व्यक्ति को शिक्षित करना है जबकि बालिका को शिक्षित करना - पूरे परिवार को शिक्षित करना होता है" के सरोकार से संस्था में सह शिक्षा के अन्तर्गत बालिकाओं के लिए बिल्कुल अलग कुछ विशेष प्रकार की व्यवस्थाएं - सुनिश्चित की गयी हैं |

  • 1 - छात्राओ को प्रवेश में प्राथमिकता |
  • 2 - छात्राओ के लिए कुछ विषयों में महिला प्रवक्त्ताओं की भी व्यवस्था |
  • 3 - प्रवेश तथा अन्य सभी प्रकार के शुल्कों को जमा करने के लिए अलग काउण्टर की व्यवस्था |
  • 4 - छात्राओ के बैठने की अलग व्यवस्था |
  • 5 - पुस्तकालय से संबंधित विभिन्न प्रकार की समस्याओं के निराकरण हेतु छात्राएं पुस्ताकालयाध्यक्ष डॉ० श्रीमती रंजना गुप्ता से सम्पर्क कर सकती है |
  • 6 - छात्राओ के प्रसाधन की अलग व्यवस्था
Maintained & Developed by Crest Logix Softserve Pvt. Ltd. - 2015-20